झारखंड विधानसभा में गणतंत्र दिवस समारोह, स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने फहराया तिरंगा।

Sandeep Jain - 1/27/2026 10:02:44 AM -

रांची: राष्ट्र, आज हर्षोल्लास से गणतंत्र दिवस मना रहा है. इस अवसर पर झारखंड विधानसभा में स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने झंडा फहराया और तिरंगे को सलामी दी. इस मौके पर विधानसभा परिसर में स्पीकर के अलावा पुलिस पदाधिकारी और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे.

तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में स्पीकर ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल एक राष्ट्रीय पर्व भर नहीं है. बल्कि यह उस संकल्प का प्रतीक है जो भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, पंथ निरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रुप में स्थापित करता है.

अपने संबोधन में विधानसभाध्यक्ष ने आगे कहा कि 1950 में 26 जनवरी को जब भारत का संविधान लागू हुआ तो यह एक वचन था जब सदियों की पराधीनता के पश्चात भारत के नागरिकों ने स्वयं अपने भाग्य का निर्धारण करने का अधिकार पाया. भारत का गणतंत्र तक का यह सफर आसान नहीं रहा. लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद हमें आजादी मिली तब हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और कर्णधारों ने केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का स्वप्न नहीं देखा था. बल्कि उन्होंने एक ऐसे राष्ट्र की परिकल्पना की थी जहां हर किसी के लिए न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों पर आधारित हो. इन्ही आदर्शों को हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान की प्रस्तावना में स्थान दिया. हमारा संविधान एक विधिक दस्तावेज भर नहीं है बल्कि यह सभी धर्म, जाति और वर्गों के आपसी सहयोग और सद्भाव के साथ रहने का अनुबंध भी है.

विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने कहा कि भारत में गणतंत्र का इतिहास सदियों पुराना है लेकिन वर्षों की गुलामी ने हमारी गणतांत्रिक व्यवस्था को तहस नहस कर दिया था. हमारे असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और त्याग से मिली आजादी के बाद हमारे देश के कर्णधारों ने एक लोकतांत्रिक गणतंत्र को आत्मसात किया. भारत के संविधान को स्वीकार करते समय बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि 26 जनवरी 1950 के बाद हमारा जीवन एक विरोधाभासी होगा.

जब राजनीतिक रूप से लोगों में बराबरी होगी, वहीं सामाजिक और आर्थिक स्थिति से लोगों में गैरबराबरी होगी. सामाजिक और आर्थिक संरचना की वजह से समाज में बराबरी नहीं होगी. बाबा साहब के शब्दों में यह गैर बराबरी तब तक चलेगा जबतक हम सामाजिक और आर्थिक गैरबराबरी को खत्म नहीं कर देते. इसी गैर बराबरी को दूर करने के लिए देश के कर्णधारों ने एक व्यक्ति एक वोट का सबसे बड़ा अधिकार दिया, आरक्षण की व्यवस्था की ताकि समाज में पीछे छूट गए वर्गों का उन्नयन हो.

तिरंगा झंडा फहराने के बाद स्वतंत्रता आंदोलन में झारखंड के वीर नायकों भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, नीलांबर-पीतांबर, वीर बुधु भगत जैसे महापुरुषों को स्पीकर ने याद किया. स्पीकर ने कहा कि देश के आर्थिक विकास को समावेशी विकास में तब्दील करना होगा तभी गणतंत्र दिवस को लेकर हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जो स्वप्न देखा था, वह पूरा होगा.