IIT-ISM धनबाद के 100वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए गौतम अडानी, भारत को महाशक्ति बनाने के लिए छात्रों को दिया मंत्र।
Sandeep Jain - 12/10/2025 9:02:38 AM -
धनबाद: देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक आईआईटी (आईएसएम) धनबाद ने आज अपना 100वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया. शताब्दी समारोह के मुख्य अतिथि अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने छात्रों, पूर्व छात्रों और शिक्षकों के सामने करीब 40 मिनट का ऐसा संबोधन दिया जो आने वाले दिनों में नीति-निर्माताओं से लेकर युवाओं तक की सोच को प्रभावित करेगा.
अडाणी ने कहा भारत को अपनी तकदीर खुद लिखनी होगी।
छात्रों को संबोधित करते हुए अडानी ने कहा कि “अगर भारत को सचमुच अपनी तकदीर खुद लिखनी है, तो उसे पहले उस धरती की भाषा समझनी होगी जिस पर वह खड़ा है. जिस देश की जमीन पर उसका पूरा हक नहीं, और उसके नीचे के संसाधनों पर उसका पूरा नियंत्रण नहीं – वह देश कभी पूरी तरह संप्रभु नहीं हो सकता और याद रखिए – जिसकी जमीन पर कब्जा, उसी की ऊर्जा पर कब्जा. जिसकी ऊर्जा पर कब्जा, उसी की संप्रभुता.”
1926 की दूरदर्शिता आज भी प्रासंगिक।
अदाणी ने संस्थान के इतिहास को याद करते हुए कहा, “साल था 1926. देश गुलाम था. फिर भी इंडियन नेशनल कांग्रेस के नेताओं ने समझ लिया था कि आजादी के बाद सबसे ज्यादा जरूरत खनन इंजीनियरों और भू-वैज्ञानिकों की पड़ेगी. कोयला, लोहा, तांबा, बॉक्साइट – ये सब देश की रीढ़ होंगे. इसी सोच ने इस संस्थान को जन्म दिया. आज 100 साल बाद वही संसाधन और वही ऊर्जा भारत को महाशक्ति बनाने का आधार बनने जा रहे हैं.”
बदलता विश्व व्यवस्था और भारत के लिए अवसर भी, चुनौती भी।
अदाणी ने मौजूदा वैश्विक हालात को बिल्कुल साफ-साफ रखा, उन्होंने कहा कि “दुनिया का पुराना ढांचा टूट रहा है. पहले देश मिलकर ट्रेड करते थे, अब हमेशा सप्लाई चेन एक-दूसरे पर निर्भर रहती थी. आज अमेरिका, चीन, यूरोप–सब अपने-अपने घर लौट रहे हैं. सेमीकंडक्टर की जंग, टैरिफ की जंग, दुर्लभ मिट्टी (Rare Earths) की जंग चल रही है. NATO, WTO, संयुक्त राष्ट्र– ये सारी संस्थाएं अपने पुराने नियमों पर सवाल उठा रही हैं.”
उन्होंने कहा कि, “यह नया नॉर्मल है. अब हर देश पहले अपनी सुरक्षा देख रहा है. ऐसे में भारत के लिए दो चीजें जीवन-मरण का सवाल बन गई हैं. उन्होंने कहा कि अपनी जमीन के नीचे क्या है, इसकी पूरी जानकारी और पूरा नियंत्रण होनी चाहिए. अपनी ऊर्जा सुरक्षा जैसे कोयला, गैस, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन ये सब कुछ अपने हाथ में”
अडानी समूह के चेयरमौन गौतम अडानी ने ने छात्रों को आगाह करते हुए कहा, “इतिहास को कभी कैनवास मत समझना जिस पर कोई और अपनी मर्जी से तस्वीर बनाए. इतिहास को आईना बनाओ. जब-जब हमने खुद को पहचानने में देर की, तब-तब किसी और ने हमारी तस्वीर अपने रंगों में रंग दी और हमारा भविष्य अपने हिसाब से लिख दिया. आज वक्त है कि हम खुद अपनी तस्वीर बनाएं और उसके लिए जरूरी है अपनी धरती की ताकत को समझना और उस पर पूरा हक जमाना.”
अंत में उन्होंने संस्थान के छात्रों से कहा कि, “आप लोग उस धरती पर पढ़ रहे हैं जिसके नीचे देश की 70% से ज्यादा कोयला खदानें, लौह अयस्क, यूरेनियम और दुर्लभ खनिज हैं. आप सिर्फ इंजीनियर नहीं बन रहे– आप उस टीम का हिस्सा बन रहे हैं जो आने वाले 50 साल तक भारत की ऊर्जा और संप्रभुता की नींव रखेगी. यह सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं, यह राष्ट्र निर्माण का सवाल है.”






