हेमंत सोरेन की तारीफ कर अमित शाह ने चौंका दिया, सियासी चाल पर सवाल.

Sandeep Jain - 8/26/2025 9:03:15 AM -

नई दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तारीफ की. उन्होंने हेमंत सोरेन के भ्रष्टाचार के आरोपों में इस्तीफा देने, कोर्ट से बरी होने और फिर 2024 में विधानसभा उपचुनाव जीतकर दोबारा सीएम बनने की प्रशंसा की. अमित शाह ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान बताया. उनका यह बयान तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब इसी प्लेटफॉर्म से अमित शाह ने महागठबंधन के ही नेता राहुल गांधी और लालू यादव जैसे नेताओं की आलोचना की. खास बात यह कि हाल में ही अमित शाह और हेमंत सोरेन रांची में पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में एक मंच पर दिखे थे.

पिछले बयानों से उलट बोले अमित शाह.
अमित शाह ने हेमंत सोरेन के इस्तीफा, बरी होने और फिर सीएम बनने की प्रशंसा को लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक बताया है. अमित शाह का यह बयान उनके पहले के रुख से अलग है, जहां उन्होंने सोरेन सरकार पर भ्रष्टाचार और घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था. 2024 में साहिबगंज और दुमका रैलियों में शाह ने सोरेन को “सबसे भ्रष्ट” सरकार का मुखिया बताया था. इस तारीफ के पीछे बीजेपी की छवि को नरम करने और विपक्ष के साथ संवाद की राह खोलने की मंशा दिखती है.

सियासी मायने और रणनीति को समझिये.
जानकार कहते हैं कि अमित शाह का यह बयान सियासी रणनीति का हिस्सा हो सकता है. दरअसल, झारखंड में बीजेपी और जेएमएम के बीच कड़ा मुकाबला रहा है, ऐसे में अमित शाह की तारीफ से बीजेपी संभवतः गैर-बीजेपी दलों के साथ तनाव कम करने की कोशिश करने की अर्थ भी सामने आ रहा है. इसके अतिरिक्त यह बिहार और झारखंड में महागठबंधन के साथ भविष्य में गठजोड़ की जमीन तैयार करने का संकेत भी हो सकता है, खासकर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए

विपक्ष के आरोपों को नरम करने की रणनीति.
जानकार कहते हैं कि वर्तमान में जब कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष संसद में भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर बीजेपी को लगातार घेर रहा है, तो ऐसे में शाह की सोरेन की तारीफ से विपक्ष की आक्रामकता को नरम करने की कोशिश दिखती है.ध्यान देने की बात यहां यह भी है कि अमित शाह ने हेमंत सोरेन की लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक प्रक्रिया के सम्मान के लिए तारीफ की. जाहिर है अमित शाह की यह रणनीति विपक्ष की लगातार हमले की धार को कुंद करने और बीजेपी की छवि को नरम दिखाने की रणनीति हो सकती है. जानकार कहते हैं कि अमित शाह का बयान विपक्ष के नैरेटिव को कमजोर कर सकता है, और संभव है कि यह सोची समझी रणनीति हो.

हेमंत सोरेन के जवाब का इंतजार क्यों?
हेमंत सोरेन की ओर से अमित शाह के बयान पर जवाब नहीं आया है, लेकिन उनकी सरकार ने पहले बीजेपी पर घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया था. हेमंत सोरेन ने कहा था कि घुसपैठ बीजेपी शासित राज्यों से हो रही है. अब अमित शाह की तारीफ संभवतः इस तनाव को कम करने और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम हो सकता है. हालांकि, अमित शाह ने हेमंत सोरेन की तारीफ कर अचानक ही झारखंड की राजनीति में सियासी हलचल मचा दी है.

बिहार-झारखंड की सियासत पर असर
अमित शाह का यह बयान बिहार की सियासत को भी प्रभावित कर सकता है जहां बीजेपी और जेडीयू गठबंधन का सामना महागठबंधन से है. अमित शाह का यह कदम विपक्ष के नेताओं को नरम करने और भविष्य में सियासी समीकरण बदलने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है. यह भी संभव है कि बीजेपी क्षेत्रीय दलों के साथ संबंध सुधारकर 2024 के लोकसभा और 2025 के विधानसभा चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती हो. सियासी गलियारे में तो यही सवाल पूछा जा रहा है कि क्या यह झारखंड और बिहार में नए सियासी समीकरण की शुरुआत है?