झारखंड में 7 लाख हेक्टेयर खेती का नुकसान, सरकार देने जा रही मुआवजा.

Sandeep Jain - 9/6/2025 10:04:05 AM -

झारखंड में इस साल ज्यादा बारिश होने से धान की खेती का 95 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो चुका है। बावजूद इसके अतिवृष्टि से राज्य भर में लगभग छह लाख, सात हजार, 215 हेक्टेयर में खरीफ फसलों का नुकसान हुआ है। यह कुल लक्ष्य का 22 प्रतिशत है। कृषि विभाग को दो सितंबर तक प्राप्त आंकड़ों में धान का नुकसान जहां महज 5.13 प्रतिशत हुआ है, वहीं मक्का, दलहन, तिलहन व मोटे अनाज की उपलब्धि में लगभग 50 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गयी है। सरकार दो अलग-अलग तरह की जमीनों के लिए दर तय की है।

सभी खरीफ फसलों की बात करें तो इस साल राज्य भर में कुल 28 लाख, 26 हजार, 252 हेक्टेयर में खरीफ फसल लगाने का लक्ष्य था, जिसके विरुद्ध 22 लाख, 19 हजार, 135 हेक्टेयर में खेती हो पाई है। मक्का, दलहन, तिलहन व अन्य मोटे अनाज की बात करें तो राज्य भर में 10 लाख 37 हजार, 852 हेक्टेयर में लगाने का लक्ष्य निर्धारित था, जबकि अतिवृष्टि के कारण महज पांच लाख 22 401 हेक्टेयर में ही इन फसलों की खेती की जा सकी है।

अतिवृष्टि से एक तरफ जहां खरीफ की खेती में 6.07 हेक्टेयर का नुकसान हो चुका है। वहीं, खरीफ में सर्वाधिक लगभग 16.97 लाख हेक्टेयर में लगी धान की फसल को लेकर अब कृषि विभाग की नजर अगले 15 दिनों की बारिश पर टिकी है। विभाग के अनुसार यदि 15 सितंबर तक बारिश नहीं हुई तो धान की खेती प्रभावित होगी। धान के खेत में अब पानी रहना जरूरी है, ताकि उसका पोषण हो सके। बारिश नहीं हुई तो जो फसल में भी दाने नहीं आएंगे। यानी, अगले 15 दिनों में बारिश नहीं होने पर फसलों के नुकसान का आंकड़ा बढ़ेगा।

आकलन के आधार पर मुआवजा
कृषि विभाग के अनुसार किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर सरकार सहायता करेगी। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के निर्देश पर सभी जिलों के उपायुक्तों को 15 सितंबर तक फसलों के नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट मांगी गयी है। साथ ही फसल बीमा योजना की तिथि तो 31 अगस्त तक निर्धारित थी, उसे बढ़ाकर 15 सितंबर कर दिया गया है। कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार राज्य आपदा निधि से फसलों की क्षति पर मुआवजा देने के लिए प्रतिबद्ध है। अगर किसी किसान की असिंचित भूमि का 33 प्रतिशत से अधिक भूमि पर नुकसान हुआ है तो 8500 रुपया प्रति हेक्टेयर मुआवजा का प्रावधान है। अगर नुकसान सिंचित भूमि पर होता है तो प्रति हेक्टेयर 17000 रुपए मुआवजा का प्रावधान है। साथ ही जो पौधा हर वर्ष नहीं लगाए जाते हैं, वैसे पौधों के लिए प्रति हेक्टेयर 22500 रुपए मुआवजा का प्रावधान है।