भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंतीः राज्यपाल, सीएम और केंद्रीय मंत्री ने उलिहातू पहुंचकर दी श्रद्धांजलि.

Sandeep Jain - 11/16/2025 11:50:01 AM -

महान स्वतंत्रता सेनानी और उलगुलान के महानायक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और केंद्रीय जनजातीय मंत्री जुएल उरांव ने आदिवासी जननायक बिरसा मुंडा के सुदूरवर्ती गांव उलीहातू पहुंच कर श्रद्धासुमन अर्पित किए. साथ ही बिरसा मुंडा की प्रतिमा के समक्ष आदिवासी परंपरा के अनुसार पूजा अर्चना कर श्रद्धांजलि दी.

इस दौरान बिरसा मुंडा के जन्मस्थली के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण कार्य का शिलान्यास भी किया. जन्मस्थली के मुख्य द्वार को तोड़कर उसे एक पारंपरिक आदिवासी डिजाइन में पुनर्निर्माण किया जाएगा, ताकि आगंतुकों को प्रवेश करते ही आदिवासी संस्कृति की झलक मिल सके. इसके साथ ही पूरे परिसर को बिरसा मुंडा की जीवनशैली, उनकी परंपराओं और आदिवासी संस्कृति को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाएगा. जहां बिरसा ओड़ा में भगवान बिरसा की प्रतिमा स्थापित है.

गौरतलब है कि भारत सरकार के जनजातीय मंत्रालय ने भगवान बिरसा मुंडा टूरिस्ट सर्किट के निर्माण के लिए 40 करोड़ की स्वीकृति दी है. नए साल में इसमें भी कार्य प्रारंभ होने की उम्मीद है. इस योजना के तहत इलाके के बिरसा से जुड़े छह गांवों को जोड़ा गया है.

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती के अवसर पर ही राज्य का गठन हुआ. झारखंड निरंतर शांति, समृद्धि और विकास की ओर अग्रसर रहे. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया, उन्होंने बिरसा मुंडा के क्रांतिकारी आंदोलन की सराहना की और कहा कि देश के इतिहास में ऐसे लोगों का अतुलनीय योगदान रहा है. इस गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित किया जाए. यहां हर गांव के लोग प्रेरणा लेने आएं, इस रूप में विकसित किया जाए. यहां के आदिवासियों की सभ्यता-संस्कृति प्रकृति से जुड़ी रही है. शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए. जनजातीय समाज की बेटियां विद्यालय, महाविद्यालय जा रही हैं. यह विकास को बढ़ाने में मददगार है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संबोधित करते हुए कहा कि लंबे समय के बाद बिरसा मुंडा के आदर्शों को कंधे पर लेकर घूमने वाले शिबू सोरेन आज 25वें वर्षगांठ पर हमारे बीच नहीं हैं. उन्होंने शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि आज वही मंजर परेशान कर रहा है. झारखंड वीरों की धरती है और इस धरती ने सभी को मजबूत बनाया और मिलजुकर राज्य बनाया. राज्य बनाने वाले हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन इसे संवारना हमलोगों के कंधे पर है. यहां की जल, जंगल और जमीन कैसे सुरक्षित रहे और आदिवासी का विकास कैसे हो यह हमारे सोच में सबसे पहले आता है.

उन्होंने दावा किया है कि आज भी राज्य का आधा खर्च गांव वालों और गरीबों के लिए कर रहे हैं. झारखंड को मबजूत करने की दिशा में सरकार आगे काम कर रही है, ताकि आने वाले
पांच सालों में किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत न पड़े. सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि बिरसा मुंडा की जन्मस्थली से शुरू होना एक सौभग्य है. राज्य आज 25 साल का हो गया. राज्य अलग होने के बाद जो पैदा हुए होंगे, वो सब जवान हो गए होंगे और वही युवा राज्य के विकास की गति देने में मदद करेंगे. राज्य अपनी ताकत के बल पर अपनी पहचान बनाता दिखेगा.

सीएम ने आगे कहा कि राज्य में खेल, पर्यटन, रोजगार और आधारभूत संरचना सहित सभी क्षेत्रों पर काम जारी है. बदलाव की शुरुआत हुई है, जल्द ही राज्य के हर एक परिवार के चेहरे पर मुस्कान होगी. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार रांची हेडक्वार्टर से नहीं, बल्कि गांव से चलेगी. इसके लिए ऐसा ही पंडाल बनाकर उस गांव का विकास किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को वेतन देते हैं तो उस अधिकारी का दायित्व है जनता की समस्याओं का समाधान करना और उनका विकास करना, जल्द ही अधिकारी गांव तक जाएंगे और गांव की विकास को आगे बढ़ाने में काम करेंगे.

जनजातीय कार्य मंत्री जुवेल ओराम ने सभा को संबोधित करते हुए झारखंड वासियों को राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि जिस दिन झारखंड राज्य का गठन हुआ, उस दिन भी मैं जनजातीय मंत्रालय का मंत्री था. केंद्रीय मंत्री जुवेल ओराम ने कहा कि अलग अलग राजनीतिक विचारधारा के बावजूद मैं दिशोम गुरु को गुरु मानता हूं. पहले खूंटी में नक्सलियों का वर्चस्व रहा, उस वक्त मुझे सुरक्षा कारणों से उलिहातु जाने से मना किया गया था बावजूद मैं मोटरसाइकिल से उलिहातु पहुंचा और उलिहातु घूमकर वापस सुरक्षित लौटा. आज यहां जितना भी विकास कार्य हुआ वह केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से किया गया है. पच्चीस वर्ष पहले जो उलिहातू था आज वह उलिहातू अलग नजर आ रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि मैं रांची से उलिहातू तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ ही आया हूं और इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं.